एमसीसी, टीआईएस, एमएसएम, एलएपी और एमईएनसीए पेलोड्स (मोम-एओ) से मंगल कक्षित्र मिशन डेटा का उपयोग करने के लिए अवसर की घोषणा

प्रारंभ दिनांक: 10 अगस्त, 2015

प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि: 10 सितंबर, 2015

अवलोकन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अंतरिक्ष विभाग (अं.वि.), भारत सरकार, ने मंगल कक्षित्र मिशन (मोम) से डेटा का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए अवसर (एओ) की घोषणा की है। मोम इसरो का पहला अंतर्गहीय अंतरिक्ष प्रोब है जो मंगल खोज के लिए समर्पित है। यह एओ मोम के पांच पेलोड्स, अर्थात् मंगल कलर कैमरा (एमसीसी), तापीय अवरक्त प्रतिबिंब स्पेक्ट्रोमापी (टीआईएस), मंगल मीथेन संवेदक (एमएसएम), लाइमन अल्फा फोटोमापी (एलएपी) और मार्स एक्सोस्पेरिक न्यूट्रल कम्पोजिशन एनालाइज़र (मेनका) से डेटा का उपयोग करने के लिए लक्षित है। 5 नवंबर, 2013 को ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन (पीएसएलवी) का उपयोग करके भारत के श्रीहरिकोटा से मोम का प्रमोचन किया गया था। इसके विज्ञान के उद्देश्यों में मंगल और इसके वायुमंडल की सतह का अन्वेषण शामिल है। मंगल पर भूगर्भीय और वायुमंडलीय क्रियाशील प्रक्रियाओं का अवलोकन आवश्यक है। इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, ऊपरी पांच वैज्ञानिक पेलोड को मोम द्वारा वहन किया गया है।

ग्रह के वायुमंडल, सतही खनिज और स्थलाकृति का अध्ययन करने के लिए मोम पर ऑन-बोर्ड पांच वैज्ञानिक उपकरणों (एमसीसी, टीआईएस, एमएसएम, एलएपी और एमईएनसीए) का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पांच उपकरणों के लिए इस एओ के भाग के रूप में अनुसंधान प्रस्ताव को आमंत्रित करने के माध्यम से उपग्रह के डेटा को राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। अवसर की घोषणा (एओ) निम्नलिखित वैज्ञानिक श्रेणियों में पेलोड से डेटा के उपयोग के लिए अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए खुला है:

एमसीसी, टीआईएस और एमएसएम

  • धूल तूफान और बादल गठन सहित मंगल ग्रह पर स्थित वायुमंडलीय प्रक्रियाओं को समझना
  • भूतल भूविज्ञान, रचना और मंगल ग्रह आकारिकी
  • फ्लुवियल एंड एओलियन प्रक्रिया अध्ययन
  • अन्य अंतर्राष्ट्रीय मिशनों के साथ मोम पेलोड डेटा का समेकित अध्ययन उदा. एमआरओ, मंगल एक्सप्रेस, मंगल ओडीसी इत्यादि
  • मंगल पर मीथेन गैस के साथ ट्रेस गैसों से संबंधित अध्ययन
  • भविष्य विज्ञान विषयों के रूप में मंगल पर उपसतह जल

एलएपी

  • मंगल वायुमंडलीय निकासन प्रक्रिया का आकलन, विशेष रूप से जल निकास दर का उपयोग करते हुए मापे गए हाइड्रोजन, ड्यूटिरियम फ्लक्स और एलएपी उपकरण से अनुमानित डी/एच अनुपात।

मेनका

  • मंगल तटस्थ एक्सोफिअर का रेडियल वितरण और संरचना संबंधी जानकारी प्राप्त करता है

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस एओ के माध्यम से चयनित परियोजना प्रस्तावों को शोध छात्र के वेतन, आकस्मिकताओं और परियोजना की बैठक और कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए सीमित यात्रा को पूरा करने के लिए सीमित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजना की अवधि तीन वर्षों की अवधि के लिए होगी। अगर उपलब्ध है, तो प्रमुख अन्वेषक (पीआई) को मंगल कक्षित्र मिशन से संबंधित डेटा सेट मुफ्त में प्रदान किए जाएंगे ।

कौन प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है?

व्यक्तियों या वैज्ञानिकों का समूह, मान्यता प्राप्त संस्थानों, विश्वविद्यालयों और भारत के सरकारी संगठनों से संबंधित शिक्षाविदो से प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा सकते हैं। सेवानिवृत्ति के पहले ही कम से कम चार साल की न्यूनतम सेवा होने वाले लोग पीआई/सह-पीआई के रूप में परियोजना का नेतृत्व करने के लिए पात्र हैं। प्रस्तावों को एओ परियोजना के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए उपयुक्त आश्वासन के साथ संस्थान के प्रमुख के माध्यम से अग्रेषित किया जाना चाहिए।