उपग्रह नौवहन

उपग्रह नौवहन सेवा वाणिज्यिक एवं सामरिक अनुप्रयोगों की प्रणाली पर आधारित उभरती हुई उपग्रह प्रणाली है। इसरो, नागरिक उड्डयन आवश्‍यकताओं की बढ़ती हुई मांगों को पूरा करने तथा स्‍वतंत्र उपग्रह नौवहन प्रणाली पर आधारित अवस्थिति, नौवहन एवं कालन की प्रयोक्‍ता आवश्‍यकताएं पूरा करने हेतु उपग्रह आधारित नौवहन सेवाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिक उड्डयन की आवश्‍यकताएँ पूरी करने हेतु इसरो जी.पी.एस. समर्थित भू संवर्धित नौवहन (गगन) प्रणाली की स्‍थापना करने के लिए भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (ए.ए.आई.) के साथ संयुक्‍त रूप से कार्य कर रहा है। स्‍वदेशी प्रणाली पर आधारित अवस्थिति, नौवहन एवं कालन सेवाओं की अवश्‍यकताएं पूरी करने हेतु, इसरो भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली (आई.आर.एन.एस.एस.) नामक प्रादेशिक उपग्रह नौवहन प्रणाली की स्‍थापना कर रहा है।

(क) जी.पी.एस. समर्थित भू संवर्धित नौवहन (गगन):

यह भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण (ए.ए.आई.) के साथ संयुक्‍त रूप से कार्यान्वित उपग्रह आधारित संर्वधन प्रणाली (एस.बी.ए.एस.) है। नागरिक उड्डयन अनुप्रयोगों हेतु आवश्‍यक परिशुद्धता एवं विश्‍वसनीयता के साथ उपग्रह आधारित नौवहन सेवाएं मुहैया कराना एवं भारतीय वायु अंतरिक्ष में बेहतर वायु यातायात प्रबंधन मुहैया कराना, गगन के मुख्‍य उद्देश्‍य हैं। यह प्रणाली अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय एस.बी.ए.एस. प्रणालियों के साथ अंतर-प्रचालनीय होगी तथा प्रादेशिक परिधियों में सींवनहीन नौवहन मुहैया करायेगी। गगन सिग्‍नल-इन-स्‍पेश (एस.आई.एस.) जीसैट-8 एवं जीसैट-10 के जरिए उपलब्‍ध है।

(ख) भारतीय प्रादेशिक नौवहन उपग्रह प्रणाली (आई.आर.एन.एस.एस.): नाविक

यह क्रांतिक राष्‍ट्रीय अनुप्रयोगों हेतु स्‍वतंत्र भारतीय उपग्रह आधारित स्थिति निर्धारण प्रणाली है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य है, भारत एवं इसके पड़ोसी देशों में विश्‍वसनीय अवस्थिति, नौवहन एवं कालन सेवाएं मुहैया कराना तथ प्रयोक्‍ता हेतु उत्‍तम ढंग से परिशुद्धता प्रदान करना। आई.आर.एन.एस.एस. मुख्‍य रूप से दो प्रकार की सेवाएं मुहैया कराएगा:

1. मानक अवस्थिती सेवा (एस.पी.एस.)

2. प्रतिबंधित सेवा (आर.एस.)

अंतरिक्ष खंड में सात उपग्रह शामिल हैं, तीन भू स्थिर कक्षा (जी.ई.ओ.) में और चार भू-तुल्‍यकाली कक्षा (जी.एस.ओ.) में, जो भूमध्‍यरेखा से 29o की आनति पर स्थित है। सात उपग्रहों के इस समूह को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा ‘’नाविक’’ नाम दिया गया और आई.आर.एन.एस.एस.-1जी, नाविक के सातवें एवं आखिरी उपग्रह के सफल प्रमोयन के उपलक्ष्‍य में उनके द्वारा इसे राष्‍ट्र को समर्पित किया गया । ये सब उपग्रह हर समय भारत के क्षेत्र पर दृष्‍टव्‍य रहेंगे। नाविक के सभी सात उपग्रह अर्थात्, आई.आर.एन.एस.एस.-1ए, 1बी., 1सी, 1डी, 1ई, 1एफ, और 1जी को क्रमश: 02 जुलाई, 2013, 04 अप्रैल, 2014, 16 अक्‍तूबर, 2014, 28 मार्च, 2015, 20 जनवरी, 2016, 10 मार्च, 2016, एवं 28 अप्रैल, 2016,  को  सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया था और से सभी उपग्रह अपनी निर्दिष्‍ट कक्षीय स्‍थानों पर संतोषजनक कार्य कर रहे हैं।

 

आई.आर.एन.एस.एस.-1आई. नाविक (भारतीय नौवहन समूह) में शामिल होने वाला आठवाँ उपग्रह है, जिसे 12 अप्रैल, 2018 को पी.एस.एल.वी.-सी41 द्वारा प्रमोचित यिा गया है। परंतु, 31 अगस्‍त, 2017 को प्रमोचित आई.आर.एन.एस.एस.-1एच./ पी.एस.एल.वी.-सी39 मिशन असफल रहा ।