सितंबर 28, 2015

पी.एस.एल.वी.-सी30/एस्‍ट्रोसैट मिशन

भारत का ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक राकेट अपनी इकतीसवीं उड़ान (पी.एस.एल.वी.-सी30) में 1513 कि.ग्रा. भार वाले एस्‍ट्रोसैट को भूमध्‍यरेखा से 6 डिग्री की आनति पर 650 कि.मी. की कक्षा में प्रमोचित करेगा। एस्‍ट्रोसैट के साथ, अंतरराष्‍ट्रीय ग्राहकां के छह उपग्रह, जैसे इंडोनेशिया का 76 कि.ग्रा. भार वाला लापान, कनाडा का 14 कि.ग्रा. भार वाला एन.एल.एस.-14(ईवी9) तथा अमरीका के चार समान लीमुर उपग्रह जिनका कुल वजन 28 कि.ग्रा. है को पी.एस.एल.वी. की इस उड़ान द्वारा प्रमोचित किया जाएगा।

पी.एस.एल.वी.-सी30 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एस.डी.एस.सी.) शार, श्रीहरिकोठा के प्रथम प्रमोचन पैड से सफलतापूर्वक प्रमोचित किया गया। पी.एस.एल.वी.-सी30 पी.एस.एल.वी. की ‘एक्‍स.एल.’ संरूपण में दसवीं उड़ान है। पिछली नौ उड़ानें इस प्रकार थीं - पी.एस.एल.वी.-सी11/ चंद्रयान-1, पी.एस.एल.वी.-सी17/ जीसैट-12, पी.एस.एल.वी.-सी19/ रिसैट-1, पी.एस.एल.वी.-सी22/ आई.आर.एन.एस.एस.-1ए, पी.एस.एल.वी.-सी25 /मंगल कक्षित्रयान, पी.एस.एल.वी.-सी24/ आई.आर.एन.एस.एस.-1बी, पी.एस.एल.वी.-सी26/ आई.आर.एन.एस.एस.-1सी, पी.एस.एल.वी.-सी27/ आई.आर.एन.एस.एस.-1डी, पी.एस.एल.वी.-सी28/ डी.एम.सी.3 मिशन। पी.एस.एल.वी.-सी30 का कुल नीतभार वजन 1631 कि.ग्रा. था।

पी.एस.एल.वी.-सी30 के अंतरराष्‍ट्रीय ग्राहक उपग्रह

लापान-ए2  राष्‍ट्रीय वैमानिकी तथा अंतरिक्ष संस्‍थान -लापान, इंडोनेशिया का सूक्ष्‍म उपग्रह है। लापान-ए2 स्‍वचालित निर्दिष्‍टीकरण प्रणाली (ए.आई.एस.), जो आपदा कम करते हुए डंडो‍नेशिया के रेडियो अव्‍यवसायी समुदाय की सहायता करती और वीडियो एवं अंकीय कैमरा के उपयोग से पृथ्‍वी का प्रेक्षण करती है, का उपयोग करते हुए समुद्री निगरानी करने के लिए अभिप्रेत है।

एन.एल.एस.-14 (ईवी9) अंतरिक्ष उड़ान प्रयोगशाला, टोरोंटो विश्‍वविद्यालय, उन्‍नत अध्‍ययन संस्‍थान (एस.एफ.एल., यू.टी.आई.ए.एस.), कनाडा का नैनो उपग्रह है। यह अगली पीढ़ी की स्‍वचालित निर्दिष्‍टीकरण प्रणाली (ए.आई.एस.) का उपयोग करने वाला समुद्री मानीटरन हेतु नैनो उपग्रह है।

स्‍पाइर ग्‍लोबल, इंक. (सैन फ्रांसिस्‍को, सीए), अमरीका के चार लेमुर नैनो उपग्रह गैर-दृशीय सुदूर संवेदन उपग्रह हैं, जो मुख्‍यत:, स्‍वचालित निर्दिष्‍टीकरण प्रणाली (ए.आई.एस.) के जरिए जहाजों के अनुवर्तन द्वारा वैश्विक समुद्री आसूचना, तथा जी.पी.एस. रेडियो उपगूहन प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए उच्‍च विश्‍वसनीय मौसम पूर्वानुमान पर केंद्रित हैं।