सितंबर 12, 2002

पीएसएलवी-सी4

पीएसएलवी-सी4 ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचक रॉकेट (पीएसएलवी) की सातवीं उड़ान और भू-तुल्‍यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में -1060 कि.ग्रा. भार वाले मेटसैट- उपग्रह को स्‍थापित करने वाली पहली उड़ान है। आरंभ में, पीएसएलवी को 900 कि.ग्रा. भार वाले भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) को 900 कि.मी. ध्रुवीय सूर्य तुल्‍यकाली कक्षा में प्रमोचित करने के लिए अभिकल्पित किया गया था। 1993 में श्रीहरिकोटा से इसके प्रथम प्रमोचन के बाद से, चार चरण वाले पीएसएलवी में उसकी क्षमता वृद्धि के लिए क्रमिक रूप से सुधार किया गया।

पीएसएलवी के पूर्व प्रमोचनों की तुलना में, पीएसएलवी-सी4 का उड़ान पथ मेटसैट को 250 कि.मी. उपभू (पृथ्‍वी से निकटतम बिंदु) और 36,000 कि.मी. अपभू (पृथ्‍वी से दूरस्‍थ बिंदु) की भू-तुल्‍यकाली अंतरण कक्षा में अंतःक्षेपण के लिए रूपांतरित किया गया। इस कक्षा की आकृति दीर्घवृत्तीय और इसका झुकाव भूमध्‍यरेखा के प्रति 18 डिग्री कोण पर होगा।

अपने वर्तमान विन्‍यास में, 44.4 मी. लम्बे, 295 टन भार वाले पीएसएलवी में चार चरण हैं जो एकांतर रूप से ठोस और द्रव नोदक प्रणालियों का उपयोग करते हैं। प्रथम चरण विश्‍व के सबसे बड़े ठोस नोदक बूस्‍टरों में से एक है और यह 138 टन हाइड्रॉक्सिल टर्मीनेटेड पॉली ब्‍यूटडीन (एचटीपीबी) वहन करता है। इसका व्‍यास 2.8 मी. है। इसका मोटर आवरण मराजिंग स्‍टील से निर्मित है। बूस्‍टर लगभग 4,628 किलो न्‍यूटन (केएन) अधिकतम थ्रस्ट विकसित करता है।

छह स्ट्रैप-ऑन मोटर, जिनमें से चार को पृथ्‍वी पर प्रज्‍वलित किया जाता है, प्रथम चरण प्रणोद का संवर्धन करते हैं। इनमें से प्रत्‍येक ठोस नोदक स्ट्रैप-ऑन मोटर 9 टन एचटीपीबी आधारित नोदक वहन करते हैं और 662 केएन थ्रस्ट उत्‍पन्‍न करते हैं।

द्वितीय चरण स्‍वदेश में निर्मित विकास इंजन प्रयोग में लाता है और 40 टन द्रव नोदक-असममित डाइ-मिथाइल हाइड्राज़ीन (यूडीएमएच) को ईंधन के रूप में और नाईट्रोजन टेट्राक्‍साइड (एन2ओ4) को आक्‍सीकारक के रूप में वहन करता है। यह लगभग 725 केएन अधिकतम थ्रस्ट उत्‍पन्‍न करता है।

तृतीय चरण 7.6 टन एचटीपीबी आधारित ठोस नोदक का प्रयोग करता है और अधिकतम 260 केएन थ्रस्ट उत्‍पन्‍न करता है। इसका मोटर आवरण पॉलीयरमाइड फाइबर से निर्मित है।

पीएसएलवी के चतुर्थ और टर्मिनल चरण में द्रव नोदक प्रयोग करने वाले दोहरे इंजन का विन्‍यास है। 2.5 टन नोदक भारण (ईंधन के रूप में मोनोमिथाइल हाईड्राज़ीन और आक्‍सीकारक के रूप में नाइट्रोजन के मिश्रित ऑक्‍साइड) सहित, इनमें से प्रत्‍येक इंजन अधिकतम 7.4 केएन थ्रस्ट उत्‍पन्‍न करता है।

पीएसएलवी का 3.2 मी. व्यास वाला बल्‍बनुमा ऊष्‍मा-कवच, जो आइसोग्रिड संरचना का बना है, पीएसएलवी के गहन वायुमण्‍डल के माध्यम से पारगमन के दौरान अंतरिक्षयान को परिरक्षित करता है।

पीएसएलवी उड़ान नियंत्रण प्रणाली में सम्मिलित हैं: क) प्रथम चरण: अक्षनमन और पार्श्ववर्तन के लिए द्वितीय अंतःक्षेपण थ्रस्ट सादिश नियंत्रण (एसआईटीवीसी), लोटन के लिए अभिक्रिया नियंत्रक थस्ट्रर तथा लोटन नियंत्रक संवर्धन के लिए दो स्‍ट्रैप-ऑन मोटर में एसआईटीवीसी, ख) द्वितीय चरण: अक्षनमन और पार्श्‍ववर्तन के लिए इंजन गिम्बल तथा लोटन के लिए तप्त गैस अभिक्रिया नियंत्रण, ग) तृतीय चरण: अक्षनमन और पार्श्ववर्तन के लिए फ़्लेक्स नोज़ल और लोटन के लिए पीएस-4 आरसीएस एवं घ) चतुर्थ चरण: अक्षनमन, पार्श्‍ववर्तन और लोटन के लिए इंजन गिम्बल तथा कोस्ट चरण के दौरान नियंत्रण के लिए ऑन-ऑफ़ आरसीएस।

पीएसएलवी की जड़त्‍वीय नौसंचालन प्रणाली (आईएनएस) इसके उपकरण कक्ष में स्थित है, जो यान के चतुर्थ चरण के शीर्ष पर स्थित है। आईएनएस यान को उत्‍थापन से कक्षा में अंतरिक्षयान के अंतःक्षेपण तक निर्देशित करता है।

उड़ान के दौरान यान के कार्य-निष्पादन के मॉनीटरन के लिए पीएसएलवी में उपकरण उपलब्‍ध कराए गए हैं। एस-बैंड पीसीएम दूरमिति और सी-बैंड प्रेषानुकर इस आवश्‍यकता की पूर्ति करते हैं। उपग्रह के कक्षा में अंतःक्षेपण पर अनुवर्तन प्रणाली उड़ान सुरक्षा और प्राथमिक कक्षा निर्धारण के लिए वास्‍तविक-समय सूचना प्रदान करती है।

पीएसएलवी चरण पृथक्‍करण, ऊष्‍मा-कवच पृथक्‍करण और प्रधार अलगाव आदि के लिए अनेक चरण अनुषंगी प्रणालियों का उपयोग करता है।

चरण
नामावली
नोदक
नोदक भार (टन)
थ्रस्ट (केएन)
ज्वलन समय (से.)
चरण व्यास (मी.)
विस्तार लं (मी.)
1
पीएस1 + पीएसओएम 6 सं.
ठोस एचटीपीबी आधारित
138+
6 X 9
4628+
6 X 662
10745
2.81.0
2010
2
पीएस 2
द्रव यूडीएमएच + एन2ओ4
40.6
725
163
2.8
12.8
3
पीएस 3
ठोस एचटीपीबी आधारित
7.6
260
109
2.0
3.6
4
पीएस 4
द्रव एमएमएच + एमओएन
2.5
2 X 7.4
515
2.8
2.9