भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस)

 


भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस)

4, कालिदास रोड, पो,बॉ. नं. 135

देहरादून 248 001

उत्तराखंड

निदेशक: डॉ. प्रकाश चौहान
ईमेल: director@iirs.gov.in


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भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आई.आई.आर.एस), भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), अन्तरिक्ष विभाग, भारत सरकार का एक यूनिट है। यह सुदूर संवेदन, भू-सूचना, स्थिति निर्धारण व नौसंचालन प्रौद्योगिकी तथा तत्संबंधित अनुप्रयोगों के क्षेत्र में क्षमता निर्माण का प्रमुख शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान है। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आई.आईआर.एस) को पहले भारतीय फोटो-निर्वचन संस्थान (आई.पी.आई) के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1996 में भारतीय सर्वेक्षण के तत्वावधान में हुई थी, जहां नवीनतम प्रौद्योगिकियों पर व्यावहारिक अनुभव के साथ विस्तृत प्रशिक्षण की व्यवस्था थी। इस संस्थान को जुलाई 1976 में राष्ट्रीय सुदूर संवेदन एजेन्सी (एन.आर.एस.ए) के साथ मिला दिया गया। सन् 1980 में एन.आर.एस.ए को अन्तरिक्ष विभाग (भारत सरकार) अंतर्गत लाया गया और बाद में सितम्बर 1, 2008 से आई.आई.आर.एस को एन.आर.एस.सी के एक भाग के रूप में इसरो के अंतर्गत लाया गया। अब 1 अप्रैल 30, 2011 से आई.आई.आर.एस को इसरो के एक अलग निकाय के रूप में मान्यता दी गई है। 

आईआईआरएस का ध्येय 'प्रौद्योगिकि अंतरण' और प्रयोक्ता जागरूकता के समग्र लक्ष्य को ध्यान में रख कर शैक्षिक संस्थाओं और प्रयोक्ता समुदाय के विषय़-विशेषज्ञों को सुदूर संवेदन और जी.आई.एस प्रौद्योगिकी/अनुप्रयोग पर स्नातकोत्तर स्तर का प्रशिक्षण देना है। इस संस्थान द्वारा विभिन्न लक्ष्य समूह की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप अनेक कार्यक्रम तैयार किये हैं। 

आईआईआरएस में नये स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न प्रयोक्ता वर्गों के लिए एम.टेक, एमएससी, स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम, एनएनआरएमएस प्रायोजित विश्वविद्यालय शिक्षकों के लिए 2 महीने का पाठ्यक्रम, विशेष माँग पर 2 सप्ताह का विशिष्ट पाठ्यक्रम और निर्णायकों के लिए 1 सप्ताह का समग्र पाठ्यक्रम जैसे अनेक पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं।

आईआईआरएस में अबतक लगभग 8000 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें एशिया तथा अफ्रीका के 77 देशों के 750 से अधिक छात्र शामिल हैं। इन विदेशी छात्रों को इसरो शेयर्स फेलोशिप कार्यक्रम, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की आई.टी.ई.सी/एस.सी.ए.ए.पी फेलोशिप योजना और अन्य फेलोशिप योजनाओं आदि का लाभ मिला है। आई.आई.आर.एस में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस के लिए अत्याधुनिक मूलभूत सुविधाओं के अलावा यहाँ पर सुदूर संवेदन, जी.आई.एस व जी.पी.एस प्रौद्योगिकी व अनुप्रयोगों में अनुभवी तथा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षण संकाय उपलब्ध है।

आई.आई.आर.एस, संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए अन्तरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिक्षा केन्द्र (सी.एस.एस.टी.ई-ए.पी) का मेजबान संस्थान व मुख्यालय भी है। इस क्षेत्र में स्थापित अपनी किस्म का पहला ऐसा संस्थान है जहां 1996 से प्रति वर्ष सुदूर संवेदन और जी.आई.एस में नियमित स्नातकोत्तर और अल्पावधि पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

आई.आई.आर.एस को राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन प्रणाली (एन.एन.आर.एम.एस) द्वारा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर पर कार्यरत अध्यापों के लिए प्रति वर्ष  8 सप्ताह अवधि का विशिष्ट पाठ्यक्रम आयोजित करने के लिए मान्यता दी गई है ताकि वे, पर संकाय को प्रति वर्ष कर ली है ताकि वे अपने विशिष्टता के क्षेत्रों में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस की  शिक्षा दे सकें और अपने संस्थान में सुदूर संवेदन और जी.आई.एस उपयोग पर एम.टेक/एम.एस.सी/स्नातकोत्तर डिप्लोमा जैसे नये कार्यक्रमों की शुरूआत कर सकें। आई.आई.आर.एस द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर  लगभग 800 विश्वविद्यालयों के शिक्षकों  को प्रशिक्षित किया है। अनेक विश्वविद्यालय आई.आई.आर.एस के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित हुए हैं तथा आईआईआरएस से मिली संस्थागत सहायता के बल पर वहां सुदूर संवेदन और जी.आई.एस में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किये हैं। 

आई.आई.आर.एस ने सुदूर संवेदन, जी.आई.एस और जी.पी.एस की मूलभूत जानकारी पर प्रशिक्षण देने के लिए एडुसैट आधारित दूर शिक्षा कार्यक्रम की पहल की है। यहां पर सन्  2007 से 2011 तक संपूर्ण भारत में फैले स्नातकोत्तर स्तर के साठ से अधिक विश्वविद्यालयों/संस्थानों के वास्ते भू सूचना में हो रही प्रगति पर एक विशेष पाठ्यक्रम सहित  छह कार्यक्रम चला कर 4000 से अधिक छात्रों को  प्रशिक्षित किया जा चुका था। इस व्यवस्था में विश्वविद्यालय के छात्र अपने  इच्छित विषय में डिग्री पाने के लिए स्नातक पूर्व अथवा स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ-साथ आईआईआरएस आऊटरीच प्रमाणपत्र कार्यक्रम में भी भाग ले सकते है और भू सूचना के इस नये और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी संभावनाओं के दायरे को विस्तार दे सकते हैं।